उस पार का प्यार-3

 

15 साल बीत चुके हैं।

आरु अब 21 साल की हो चुकी है — एक सुंदर, समझदार और भावुक युवती। उसकी आंखों में वही गहराई है जो कभी अनामिका की आंखों में थी… और मुस्कान में वही मासूमियत जो शिव से विरासत में मिली।

वो अब दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में साहित्य पढ़ रही है — और प्यार की कहानियाँ लिखती है। लेकिन वो जानती नहीं थी कि उसकी सबसे पहली और गहरी कहानी… उसी से जुड़ी है।

उसने कभी शिव से ज़्यादा नहीं पूछा, बस इतना जाना कि उसकी माँ बहुत खास थीं, और शिव… सिर्फ़ उसके पापा नहीं, उसके सबसे बड़े हमसफ़र भी थे।



कॉलेज में आरु की मुलाक़ात अयान नाम के एक लड़के से हुई — उम्र में उससे एक साल छोटा, लेकिन दिल से बहुत बड़ा। दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।

अयान आरु को बहुत चाहता था, लेकिन जानता था कि वो बहुत संजीदा लड़की है। एक दिन जब उसने आरु से अपने दिल की बात कह दी, तो वो कुछ पल के लिए चुप रही… फिर बोली:

“मैं तुमसे दूर नहीं जाना चाहती… लेकिन एक सच है जिसे जाने बिना मैं किसी को अपना नहीं बना सकती।”

उस रात आरु ने पहली बार शिव से माँ के बारे में सब कुछ जानने की ज़िद की।


शिव ने चुपचाप अनामिका की डायरी उठाई और आरु को दी।

“ये पढ़ लो… फिर अगर सवाल बचे, तो मैं हूँ।”

आरु ने पूरी रात वह डायरी पढ़ी।

पढ़ते-पढ़ते उसकी आँखों से आंसू बहते रहे — जब अनामिका ने लिखा कि उसे कैंसर है… जब उसने लिखा कि शिव को बिना बताए जा रही है… और जब उसने लिखा कि आरु उसकी शिव से हुई संतान है।

आरु फूट-फूटकर रो पड़ी।

सुबह शिव के पास आई, आँखों में लालिमा और आंसुओं की परछाई।

“पापा… क्या आपने कभी किसी और से प्यार किया?”

शिव ने मुस्कुरा कर कहा, “नहीं… क्योंकि मैं अनामिका से **अब भी प्यार करता हूँ। वो कहीं गई नहीं है।”

“और आपने मुझसे कभी कुछ नहीं छुपाया?”

“बस वो… जो तुम्हें सही समय पर ही जानना था।”

आरु ने शिव का हाथ पकड़ लिया। “मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। आज मैं जान गई कि मेरा जन्म प्यार से हुआ था — ना समाज की मंजूरी से, ना किसी समझौते से… बल्कि सच्चे, पवित्र प्यार से।”


आरु ने अब अयान को सब कुछ बता दिया।

अयान ने एक लंबी सांस ली और कहा, “तुम्हारी माँ और तुम्हारे पापा की कहानी ने मुझे ये सिखाया है कि प्यार उम्र नहीं देखता, समाज नहीं देखता — बस एक दिल को दूसरे दिल से जोड़ता है। मैं तुम्हारे साथ हूँ, जब तक तुम चाहो।”

आरु ने अयान को गले लगा लिया — और पहली बार अपने दिल में एक नई शुरुआत की दस्तक सुनी।


अब आरु, अयान और शिव — तीनों हर साल अनामिका की याद में उसी पुरानी लाइब्रेरी की खिड़की के पास बैठते हैं।

उस जगह को आरु ने अब एक "अनामिका प्रेम केंद्र" बना दिया है — जहां कोई भी आकर अपनी अधूरी प्रेम कहानी सुना सकता है, और पढ़ सकता है उन लोगों की कहानियां जिन्होंने समाज के खिलाफ जाकर सच्चा प्यार किया।

उस खिड़की के पास अब एक छोटी सी पट्टिका है, जिस पर लिखा है:

"जहाँ पहली बार हमने एक-दूसरे की आंखों में लिखा प्यार पढ़ा था — अनामिका & शिव"

और उसके नीचे लिखा है:

"और अब यहाँ से कई नई कहानियाँ जन्म लेंगी… आरु"

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